पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल नरवणे ने दो टूक लहजे में कहा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने रविवार को कहा कि युद्ध रोमांटिक नहीं है और इसे बॉलीवुड फिल्म की तरह महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका यह बयान युद्धविराम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद आया है।
पुणे में इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता को रोकने के बारे में उठाए जा रहे सवाल युद्ध के गंभीर और दर्दनाक परिणामों को नजरअंदाज करते हैं। नरवणे ने कहा कि हालांकि अगर आदेश दिया जाता है तो वह युद्ध के लिए जाएंगे, लेकिन यह उनकी पहली पसंद नहीं होगी। उन्होंने कूटनीति और बातचीत के जरिए संघर्षों को सुलझाने के महत्व पर जोर दिया।
नागरिकों, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वालों पर पड़ने वाले प्रभावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गोलाबारी के कारण बच्चे समेत लोग डर में रहते हैं और कई लोग पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं, कभी-कभी दशकों तक। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है और उन्होंने न केवल देशों के बीच बल्कि समुदायों, राज्यों और परिवारों के भीतर भी शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान का आग्रह किया।
उनकी यह टिप्पणी पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा 7 मई को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में सात आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। याद दिला दें कि उन्होंने पद पर रहते हुए गलवान घाटी की घटना के बारे में भी साफ शब्दों में कहा था कि वहां भारतीय सेना ने चीन की सेना को ऐसा सबक सीखाया है कि वह अब हमेशा इसे याद रखेगा। इसके साथ ही चीन को यह भी पता चल गया है कि यह 1962 वाली भारतीय सेना नहीं है। वर्तमान में भारतीय सेना युद्ध संबंधी किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है।