पहलगाम की घटना पर नाराजगी स्वाभाविक है। भारत के साथ बार बार ऐसा होना वर्ष 2008 में बनी नसीरुद्दीन शाह की फिल्म ए वेडनसडे की याद दिला जाती है। लेकिन शायद इस बार का माहौल कुछ और है जबकि कश्मीर के लोग भी इस नृशंस हत्याकांड के खिलाफ खड़े हैं। देश के मुसलमानों ने भी अपने अपने स्तर पर इस घटना का खुलकर विरोध जताया है।
इसका नतीजा यह हुआ है कि हिंदू मुसलमान का एजेंडा का प्रचार फुस्सा हो गया है। भारत ने 24 अप्रैल को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर लिया गया।
इस निर्णय के तहत, भारत ने चिनाब नदी का पानी पाकिस्तान की ओर जाने से रोक दिया है, जिसका असर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में देखा जा रहा है। वहीं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है कि भारत से पानी की एक भी बूंद पाकिस्तान में न जाने पाए।
24 अप्रैल को, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की। इस संधि के तहत, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों, जैसे चिनाब, झेलम, और सतलुज, के पानी का बंटवारा होता है। संधि के अनुसार, चिनाब और अन्य पश्चिमी नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को जाता है, जबकि भारत को सीमित उपयोग का अधिकार है।
हालांकि, पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत को यह कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया। सरकार का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद को समर्थन और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के कारण यह संधि अब भारत के हितों के खिलाफ है। चिनाब नदी पर बने बगलिहार जलविद्युत परियोजना के जरिए भारत ने नदी के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना शुरू कर दिया है।
इस कदम के बाद, पाकिस्तान के सियालकोट, पंजाब में स्थित मारला हेडवर्क्स के स्थानीय लोगों ने बताया कि चिनाब नदी में पानी का स्तर काफी कम हो गया है। चिनाब नदी पाकिस्तान के कृषि और पेयजल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) द्वारा किए गए आतंकी हमले में कम से कम 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान पर अपने क्षेत्र में चरमपंथी तत्वों को सहायता प्रदान करके हमले की योजना बनाने में शामिल होने का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तान ने इस तरह के किसी भी समर्थन से इनकार किया।
सिंधु जल संधि और शिमला समझौते जैसी मील के पत्थर की संधियों को रोक दिया गया है क्योंकि दोनों देश कूटनीतिक जुड़ाव की शर्तों को फिर से लिख रहे हैं। तनाव इस हद तक बढ़ गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत द्वारा पाकिस्तान को सिंधु जल आपूर्ति में हस्तक्षेप करने का कोई भी प्रयास युद्ध की कार्रवाई के बराबर होगा।
इसी बात पर फिल्म अनोखी रात का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था इंदीवर ने और संगीत में ढाला था रोशन ने। इसे मुकेश कुमार ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।
ओह रे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौन से जल में
कोई जाने ना
ओह रे ताल मिले नदी के जल में …
सूरज को धरती तरसे
धरती को चंद्रमा, धरती को चंद्रमा
पानी में सीप जैसे प्यासी हर आतमा
ओ मितवा रे ए ए ए ए पानी में …
बूंद छुपी किस बादल में
कोई जाने ना
ओह रे ताल मिले नदी के जल में …
अन्जाने होंठों पर ये
पहचाने गीत हैं, पहचाने गीत हैं
कल तक जो बेगाने थे जनमों के मीत हैं
ओ मितवा रे ए ए ए कल तक …
क्या होगा कौन से पल में
कोई जाने ना
ओह रे ताल मिले नदी के जल में …
मेरे दिमाग में जो कंफ्यूजन है, वह इसी वजह से है। अगर भारत ने पानी रोक दिया तो इस बहते पानी का वह क्या करेगा, इस पानी को किसी कारखाना में डालकर रोटी तो नहीं बनायी जा सकती और रातों रात वैसे डैम भी नहीं बनाये जा सकते, जो इस पानी को रोक दे। दूसरी तरफ पाकिस्तान को अगर पानी नहीं मिला तो वह कहां से इतने अधिक जल का इंतजाम करेगा।
अगर यह सवाल विज्ञान सम्मत हैं तो इसके आगे क्या होगा, बताना मुश्किल है। दोनों तरफ कोई दशरथ मांझी तो है नहीं कि पहाड़ काटकर रास्ता बना लेगा। पानी के विवाद में कहावत याद आ रही है कि तेल देखिए और तेल की धार देखिए।