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अलास्का की स्थिति पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजर

वहां की ज्वालामुखी से चिंताएं बढ़ रही है

लंदनः पूरी दुनिया के लिए यह एक भय का माहौल है। आशंका है कि वैश्विक परिदृश्य को कभी भी यह घटना प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अलास्का का सबसे बड़ा ज्वालामुखी चिंता का विषय है। वैज्ञानिकों को डर है कि ऐसा कई भूमिगत प्रक्रियाओं के कारण हो रहा है।

हम बात कर रहे हैं अलास्का के माउंट स्पर ज्वालामुखी की। कुक इनलेट के पार एंकोरेज से 124 किलोमीटर दूर स्थित बर्फ से ढके स्ट्रेटोज्वालामुखी में अचानक भूकंपीय गतिविधि में भारी वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2024 से इस क्षेत्र में भूकंप की एक श्रृंखला देखी गई है। अलास्का ज्वालामुखी वेधशाला के वैज्ञानिकों को डर है कि लगातार आने वाले भूकंपों के कारण भूमिगत मैग्मा फट सकता है। ज्वालामुखी विस्फोट कभी भी हो सकता है। अत्यंत ठंडे इलाके में इस किस्म के भीषण ज्वालामुखी विस्फोट का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने से भूकंप की संख्या में वृद्धि हुई है। स्थिति पर नजर रखने से 1953 और 1992 के भयावह विस्फोटों की याद आती है। मैट हेनी का मानना ​​है कि इसी प्रकार का, अर्थात् विनाशकारी ज्वालामुखी विस्फोट होने की संभावना लगभग 50-50 है। वह भी भूकंप को ही इसका कारण बता रहे हैं।

उनके अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सामान्य से अधिक भूकंप आए हैं। लेकिन पिछले महीने में इसकी मात्रा और बढ़ गई है, तथा साथ ही भूकंप का स्थान भी बदल गया है। लेकिन यह अन्यथा भी हो सकता है। दूसरे शब्दों में, हो सकता है कि यह अपेक्षा के अनुरूप न घटित हो। इस संदर्भ में, कई लोग 2004 और 2005 की घटनाओं के बारे में बात कर रहे हैं।

उस समय, बार-बार भूकंप आते रहे। हालाँकि, 2006 तक स्थिति फिर से शांत हो गयी थी। अब चिंता इस बात की है कि अगर वाकई ऐसा हुआ तो समुद्री जलस्तर बढ़ने के साथ साथ आसमान में राख के बादलों का पूरी दुनिया में फैल जाना परेशानियां पैदा कर सकता है।