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घाटी और पहाड़ के बीच रास्ते खोले गये

शांति स्थापित करने की दिशा में नया सरकारी प्रयास

राष्ट्रीय खबर

गुवाहाटीः मणिपुर सरकार ने घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच मार्गों को खोलने का फैसला किया है। इन मार्गों से अब दोनों तरफ के लोग सुरक्षा के साथ आवाजाही कर सकेंगे। इस कदम का मकसद मणिपुर में एक साल से जारी हिंसा के बाद सामान्य स्थिति बहाल करना है। मई 2023 से मणिपुर में कूकी और मैतेई समुदायों के बीच जारी संघर्ष के कारण दोनों क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे के इलाके में यात्रा नहीं कर पा रहे थे।

कूकी समुदाय के लोगों के लिए इम्फाल एयरपोर्ट तक पहुंचना मुश्किल हो गया था, क्योंकि यह मैतेई क्षेत्र में स्थित है, वहीं मैतेई लोग कूकी-प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं जा पा रहे थे। राज्य सरकार ने अब घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच यात्रा के लिए एक नया मार्ग खोला है। इस मार्ग पर यात्रा के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

मणिपुर के मुख्य सचिव द्वारा जारी किए गए एक परिपत्र के अनुसार, दोनों पक्षों को आश्वासन दिया गया है कि यदि वे दूसरे पक्ष की यात्रा करना चाहते हैं, तो उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाएगी। यह सरकारी निर्देश बताता है कि इम्फाल-कांगपोकपी-सेनापति, सेनापति-कांगपोकपी-इम्फाल, इम्फाल-बिशनुपुर-चुराचांदपुर, चुराचांदपुर-बिशनुपुर-इम्फाल के मार्गों को खोला जा रहा है।

प्रारंभ में यात्रा के समय को सीमित किया जाएगा, और जो लोग यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें परिपत्र में सूचीबद्ध उनके संबंधित जिलाधिकारी के मोबाइल नंबरों पर संपर्क करना होगा। सरकार ने सभी पक्षों से इस पहल में सहयोग और समर्थन की अपील की है और कहा है कि इन मार्गों पर वाहनों की आवाजाही में किसी भी प्रकार की हिंसा या अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कूकी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम के नेता गिन्जा वुआलजोंग ने कहा कि यह पहल अच्छी है, लेकिन जमीन पर यह संभव नहीं है। कोई भी मैतेई कूकी-जो क्षेत्र में बस से नहीं जाएगा, और कोई कूकी-जो मैतेई क्षेत्रों में बस से नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह इसे सिर्फ दिखावे के लिए कर रहे हैं।

वहीं, उरीपोक अपुंबा लुप के कोषाध्यक्ष और मैतेई नेता, ब्रिज किशोर सिंह ने कहा, राजनीति दोनों समुदायों को अलग करने का काम कर रही है। ऐसी पहल स्वागत योग्य है, लेकिन अगर राजनीति हल नहीं होती, तो यह सब व्यर्थ होगा। एक संवाद की आवश्यकता है। इस समय मणिपुर में शांति और संवाद की ओर एक कदम बढ़ाया गया है, लेकिन इससे पहले की स्थायी शांति स्थापित हो, राजनीति और कूटनीति की चुनौतियाँ बनी रहेंगी।