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बंगाल में नया राज्यपाल आने की आहट

केंद्र सरकार अब राज्यपाल का विकल्प तलाश रहा है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कई लोगों का मानना ​​है कि सीवी आनंद बोस को राज्यपाल पद से हटाना अपरिहार्य होता जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री कार्यालय और राजभवन विवाद अपने चरम पर पहुंच गया है। राज्य भाजपा के कुछ शीर्ष नेता लंबे समय से चाहते थे कि आनंद बोस को हटाया जाए। हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद समीकरण काफी बदले हुए नजर आ रहे हैं।

साउथ ब्लॉक सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ आम सहमति से नए राज्यपाल को बंगाल भेजा जा सकता है। सूत्र का दावा है कि नवान्न और रायसीना पहाड़ के बीच इस संबंध में चर्चा के दरवाजे खुले हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि राजभवन में सीवी आनंद बोस के लिए वैकल्पिक चेहरा चुनने के सवाल पर राज्य के भाजपा नेताओं का उत्साह कम होने लगा है।

सूत्रों का दावा है कि शुभेंदु अधिकारी लोकसभा चुनाव से पहले सीवी आनंद बोस को हटाने की मांग कर रहे हैं। भाजपा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने राज्यसभा में अमित शाह से यही मांग की। स्वपन, मोदी-शाह अखिल भारतीय राजनीति में करीबी संबंधों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली का दौरा किया था। ताजा खबर यह है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने राजभवन के लिए वैकल्पिक चेहरे के चयन पर उनसे चर्चा नहीं की।

जैसा कि अतीत में बार-बार देखा गया है, संघीय व्यवस्था में राज्यपालों की नियुक्ति में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय होता था। पहले यूपीए काल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के परामर्श से गोपालकृष्ण गांधी को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में एमके नारायणन की नियुक्ति के दौरान प्रणब मुखोपाध्याय ने बुद्धदेव भट्टाचार्य से भी बात की थी।

केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस वर्षों में वह परंपरा नहीं देखी गई है। लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव के बाद बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात कर चुके हैं। राजनाथ वरिष्ठ कैबिनेट सदस्य हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एनडीए सहयोगियों और अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ संवाद और संबंध बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी है।

इसके अलावा राजनाथ के ममता के साथ निजी रिश्ते भी अच्छे हैं। सिर्फ राजनाथ ही नहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहर ने हाल ही में मुख्यमंत्री से फोन पर बात की थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी न्याय समिति के क्रियान्वयन से पहले मुख्यमंत्री से बात की थी। सूत्रों का दावा है कि इन चर्चाओं में राजभवन का विषय भी उठा है। इस बीच, राज्यपाल सीवी आनंद बोस पिछले आधे साल से बंगाल से बाहर हैं।

वह कई दिनों से दिल्ली में थे। बीच में एक दिन के लिए सिलीगुड़ी जाएँ और दिल्ली लौट आएँ। दो दिनों तक कोलकाता आने के बाद राज्यपाल फिर केरल गये। भाजपा के एक प्रदेश नेता के शब्दों में, एक बात गौर करने लायक है। जब जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब दिल्ली आते थे तो उनसे मुलाकात करते थे। आनंद बोस के मामले में ऐसा कुछ नजर नहीं आता। जो कि अच्छा संकेत नहीं माना जाता है।