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पूर्वोत्तर के विकास के लिए केंद्र सरकार गंभीर: मोदी

  • केंद्र ने 3202.7 करोड़ रुपये मंजूर किये

  • मोदी की पहल पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी

  • सौ प्रतिशत वित्तपोषण वाली केंद्र की योजना

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज  कहा है कि केन्द्र सरकार पूर्वोत्तर के विकास के प्रति गंभीर है। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार के लगातार प्रयासों से पूर्वोत्तर भारत अपने विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है। पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले नौ साल में क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों में पूर्वोत्तर के विकास के लिए तकरीबन एक हजार से ज्यादा मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया था और इनमें से 93 प्रतिशत का समाधान भी हुआ है।

यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिये 8,139.50 करोड़ रूपये की मंजूरी प्राप्त पूर्वोत्तर विशेष अवसंरचना विकास योजना (एनईएसआईडीएस) को आगे बढ़ाया जा रहा है। कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त इस योजना में दो घटक एनईएसआईडीएस- सड़क और एनईएसआईडीएस- सड़क अवसंरचना से इत्तर (ओटीआरआई) हैं।

यह 100 प्रतिशत वित्तपोषण के साथ केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है। पूर्ववर्ती पूर्वोत्तर सड़क क्षेत्र विकास योजना (एनईआरएसडीएस) का एनईएसआईडीएस – सड़क घटक में विलय करने सहित सरकार के अन्य फैसलों को देखते हुये पुनर्गठित एनईएसआईडीएस को 15वें वित्त आयोग की शेष अवधि के दौरान अमल में लाने और उसकी व्यवस्था के लिये नये दिशानिर्देश तैयार करना जरूरी हो गया था।

यही वजह है कि एनईएसआईडीएस के दोनों घटकों की योजनाओं को अमल में लाने और उनका प्रबंध देखने के लिये नये तैयार दिशानिर्देश अब जारी कर दिये गये हैं। इन्हें जारी करने से पहले हितधारकों के साथ और आंतरिक तौर पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। एनईएसआईडीएस का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में परिवहन संपर्क स्थापित करने सहित पहचान वाले क्षेत्रों में अवसंरचना विकास को समर्थन देना है।

प्रधानमंत्री कार्यालय से दिए हुए बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भी 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिये 3,202.7 करोड़ रूपए की कुल योजना के साथ ‘एनईसी योजनाओं’ को जारी रखने को मंजूरी दी है। ‘‘एनईसी योजनाओं’’ के लिये भी विस्तृत चर्चा और विचार विमर्श के बाद नये दिशानिर्देश जारी कर दिये गये हैं।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की उपरोक्त योजनाओं का उद्देश्य एक तरफ जहां विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रयासों को पूरा करना है वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर राज्यों में महसूस की जा रही ऐसी विकास/कल्याणकारी गतिविधियों को पूरा करना है जो कि केन्द्रीय योजनाओं के दायरे में नहीं हैं।

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की योजनायें पूर्वोत्तर क्षेत्र के आठ राज्यों की उनकी जरूरतों के मुताबिक शुरू की गई योजनाओं को पूरा करने में मदद करना है। उदाहरण के तौर पर इनमें कनेक्टिविटी संबंधी अवसंरचना विकास योजनाओं और सामाजिक क्षेत्र की कमियों को दूर करने और आजीविका और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसी योजनाओं को समर्थन दिया जाता है। योजनाओं को लेकर नये जारी किये गये विस्तृत दिशानिर्देशों के साथ ही मंत्रालय द्वारा किये जाने वाले प्रयासों और पूर्वोत्तर राज्यों के अनुकूल समर्थन से क्षेत्र में वांछित उद्देश्यों को पारदर्शी और त्वरित गति से हासिल करने में सहायता मिलेगी।