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चार राज्यों के विधानसभा चुनाव की तैयारी

  • सिर्फ मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है

  • तेलेंगना में पार्टी के अंदर बहुत अधिक गुटबाजी

  • पश्चिम बंगाल से भाजपा को फिर हार का खतरा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चार राज्यों में चुनाव से पहले पार्टी की रणनीति तय करने के लिए बैठक कर रहा है। रविवार को हैदराबाद शहर में इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा करेंगे, ऐसी सूचना है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में 11 राज्यों के भाजपा अध्यक्ष शामिल होंगे।

इस साल के अंत तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और राजस्थान में विधानसभा चुनाव। इसके अलावा इसी साल पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में भी चुनाव होने हैं। हर साल लोकसभा चुनाव। उससे पहले पद्मा खेमा चुनावी राज्यों में पार्टी नेतृत्व को झकझोरने की कोशिश कर रहा है।

इस संबंध में वे कर्नाटक के हालिया नतीजों को ध्यान में रखना चाहते हैं। दरअसल पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव के बारे में मिल रही सूचनाओं से भी भाजपा नेतृत्व गंभीर है। कई मीडिया सर्वेक्षणों में यह बताया गया है कि भीषण हिंसा के बीच हुए इस चुनाव में भी टीएमसी एकतरफा जीत हासिल करने जा रही है।

जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं उनमें मध्य प्रदेश को छोड़कर सभी राज्यों में विपक्षी दल सत्ता में हैं। मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने के अलावा भाजपा को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी सत्ता हासिल करने की उम्मीद है। वे तेलंगाना में भी पहली बार सत्ता में आना चाहते हैं। भाजपा नेतृत्व को लगता है कि अगर वे तेलंगाना जीत गए तो उनके लिए ‘दक्षिण भारत के दरवाजे’ खुल जाएंगे। कर्नाटक में सत्ता से बाहर होने के बाद भाजपा किसी अन्य दक्षिणी राज्य में सत्ता में नहीं है।

तेलंगाना में पार्टी की अंदरूनी कलह ने भाजपा को चिंता में डाल रखा है। हाल ही में उस राज्य का अध्यक्ष बदला गया है। विवादास्पद अध्यक्ष बंदी संजय को हटा दिया गया और केंद्रीय मंत्री जी किसान रेड्डी को इस पद पर लाया गया। माना जा रहा है कि भाजपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी रणनीति को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल किया है।

दूसरी ओर, नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले आखिरी बार कैबिनेट में फेरबदल करने की तैयारी में है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर नड्डा कई राज्यों के भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों से बात कर चुके हैं। 20 जुलाई को संसद में फेरबदल शुरू होने से पहले इस फेरबदल की घोषणा की जा सकती है।

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के बाद भाजपा के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने पंचायत चुनाव में केंद्रीय बलों का इस्तेमाल नहीं करने की शिकायत की। उनकी शिकायतें प्रशासन की ओर निर्देशित थीं। दिलीप घोष ने यह आरोप लगाते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग की कि उन्हें वोट देने ही नहीं दिया गया।

पंचायत चुनाव की शुरुआत से लेकर अंत तक विपक्ष दावा करता रहा है कि अकारण आतंकवाद हुआ है। ऐसा देखा जा रहा है कि इस चुनाव में 15 लोग मारे गये हैं। इनमें से 9 तृणमूल कांग्रेस से हैं। स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठने लगा है कि अगर तृणमूल के लोग हिंसा में शामिल थे तो उनके इतने सारे कार्यकर्ता क्यों मारे गये।

11 जुलाई को पंचायत चुनाव के नतीजे घोषित किये जायेंगे। विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी उस दिन राज्य चुनाव आयोग और आतंकवाद के खिलाफ मामला दायर करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय जाएंगे। और उससे एक दिन पहले दमदम से सांसद ने दावा किया था कि मरने वालों में ज्यादातर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता थे।

अभी से ही तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत का आंकड़ा बढ़ने लगा है। दिलीप घोष ने इस स्थिति के लिए राज्य चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि अगर केंद्रीय बलों का सही इस्तेमाल किया जाता तो ये चीजें नहीं होतीं। दूसरी तरफ तृणमूल का आरोप है कि भाजपा की गुंडागर्दी को संरक्षण देने के लिए ही केंद्रीय बलों को यहां भेजा गया था, जो हिंसा के दौरान मूक दर्शक बने रहे।