Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Sonipat Firing Case: देवीलाल कॉलोनी में गोलियों की गूंज; वर्चस्व की लड़ाई में युवकों ने की ताबड़तोड़... Indore Voter ID Update: इंदौर में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या सुधार का आखिरी मौका; जानें क्या है ... MP PWD Transfer News: मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग में बड़े तबादले, प्रभारी मुख्य अभियंताओं को मिली ... MP UCC Meeting: UCC समीक्षा बैठक में सीएम मोहन यादव का सख्त अंदाज; दतिया कलेक्टर-एसपी को लगाई फटकार Katni Bus Accident: कटनी में भीषण सड़क हादसा; हाइवा से टकराकर पलटी बस, 5 लोगों की मौत और कई घायल Satna Nagod Firing Case: राजघराने के गोलीकांड में नया मोड़; पुलिस चौकी में आरोपी महिला को मिला VIP ट्... Instagram Fake Profile Case: इंस्टाग्राम पर रईस दिखने वाला निकला पुताई करने वाला मजदूर; कॉलेज छात्रा... Garra Bridge Controversy: बालाघाट में बना 'क्रिकेट बैट' जैसा रेलवे ओवरब्रिज; गायब हुआ फुटपाथ, मचा हड़... MP Police Suicide Case: मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों में बढ़ रहा तनाव; 12 दिनों में 5 जवानों ने की आ... MP Police Suicide Case: मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों में बढ़ रहा तनाव; 12 दिनों में 5 जवानों ने की आ...

मात्र चार महीने में पेरू की चौतीस सौ महिलाएं लापता

लिमाः देश में इस वर्ष के जनवरी से अप्रैल के बीच पेरू में 3,400 से ज्यादा महिलाएं लापता हो गईं। देश के लोकपाल कार्यालय ने शनिवार (10 जून) को कहा। यह बात बाहर आने के बाद वहां राजनीतिक बवाल मच गया है। 2023 के पहले चार महीनों में, 3,406 महिलाओं के लापता होने की सूचना मिली थी।

कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक लापता हुई महिलाओं और लड़कियों में से केवल 1,902 ही पाए गए हैं, और 1,504 अभी भी लापता हैं। वैसे सरकारी स्तर पर इन महिलाओं का क्या हुआ है, इस बारे में अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। देश के उप लोकपाल इसाबेल ऑर्टिज़ ने कहा कि गायब होने को पेरू में आसन्न खतरे की स्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, राज्य 33 मिलियन लोगों के इस देश में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। इसी बहस के बीच यह आंकड़ा भी सामने आया है कि महिलाओं और लड़कियों के लापता होने का यह सिलसिला पहले से ही चला आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 2022 में, 5,380 से अधिक महिलाओं, ज्यादातर लड़कियों और किशोरों के लापता होने की सूचना मिली थी।

यह संख्या 2021 के मुकाबले 9.7 फीसदी कम है। विभिन्न नारीवादी गैर सरकारी संगठनों के अनुसार, पुलिस और अभियोजक का कार्यालय कई मामलों की पर्याप्त जांच नहीं करता है क्योंकि उनका मानना ​​है कि महिलाएं स्वेच्छा से भाग गई हैं। दूसरी तरफ इन महिलाओं और लड़कियों का इस्तेमाल मानव तस्करी के लिए भी किये जाने का संदेह व्यक्त किया गया है।

दरअसल सरकारी स्तर पर औपचारिक तौर पर इनके लापता होने पर कोई बयान नहीं आने की वजह से ही ऐसा संदेह और बढ़ रहा है। कुछ संगठनों ने आशंका जतायी है कि देश में व्याप्त गरीबी का फायदा उठाकर कोई अंतर्राष्ट्रीय गिरोह चंद पैसों की लालच में इन महिलाओ को दूसरे देशों तक पहुंचा रहा है। एक बार देश से बाहर चले जाने के बाद वे दरअसल कहां और किस हाल में है, इसकी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।