MP Rajya Sabha Election: विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने पर गरमाई मध्य प्रदेश की सियासत; जानें कांग्रेस ने क्यों उठाया ये कदम?
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर है। अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित करने और भाजपा की संभावित ‘तोड़फोड़’ की राजनीति से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित ठिकाने यानी बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है। इस कदम ने प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
👤 उमंग सिंघार का आरोप: “भाजपा कर रही है राजनीतिक गड़बड़ी”
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि विधायकों को ऐसे राज्य में भेजा जा रहा है जहाँ कांग्रेस की सरकार है। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के विधायक उन लोगों के प्रलोभन को ठुकरा रहे हैं जो ‘झोले और थैले’ लेकर उनके घर पहुंच रहे हैं। सिंघार के अनुसार, यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला पड़ाव है।
😨 “मोदी-शाह के मॉडल का डर”
महिदपुर विधायक दिनेश जैन ने खुलकर कहा कि उन्हें क्रॉस वोटिंग का नहीं, बल्कि ‘मोदी-शाह मॉडल’ और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का डर है। उन्होंने दावा किया कि लगभग हर विधायक तक भाजपा के ऑफर पहुंच रहे हैं और उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। इसी दबाव से बचने के लिए विधायक बेंगलुरु जा रहे हैं ताकि मतदान तक एकजुटता बनी रहे।
🛡️ महिला उम्मीदवार के खिलाफ षड्यंत्र का दावा
डबरा विधायक सुरेश राजे और मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारना एक सोची-समझझी साजिश है। उनका आरोप है कि भाजपा एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करती है और दूसरी ओर कांग्रेस की महिला उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को हराने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रही है।
🤝 कांग्रेस का दावा: एकजुट है पार्टी
पार्टी नेताओं का एक सुर में कहना है कि कांग्रेस में कहीं कोई असंतोष नहीं है। सभी विधायक पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं और मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा जीत सुनिश्चित है। बेंगलुरु का यह दौरा केवल आपसी एकजुटता को और अधिक पुख्ता करने के लिए एक रणनीतिक कदम है।